मध्य प्रदेश के रीवा जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोलने वाला एक बेहद संवेदनशील और झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। यहाँ इंजीनियरिंग के अंतिम वर्ष के एक मेधावी छात्र अक्षत शुक्ला की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी है। इस घटना के बाद से मृतक के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और आम नागरिकों के मन में निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली को लेकर गहरा आक्रोश देखने को मिल रहा है। परिवार ने इलाज के दौरान गंभीर लापरवाही, मनमाने तरीके से मरीजों को एक से दूसरे अस्पताल में रेफर करने और मौत के बाद घोर संवेदनहीनता दिखाने के गंभीर आरोप लगाए हैं।

इंजीनियरिंग छात्र अक्षत शुक्ला की अचानक बिगड़ी तबीयत और अस्पतालों का चक्कर
मात्र 22 वर्ष की उम्र में अपनी उज्ज्वल भविष्य की उम्मीदें संजोए अक्षत शुक्ला का जीवन इस तरह अचानक समाप्त हो जाएगा, किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था। वह पढ़ाई में बेहद कुशाग्र थे और अपने परिवार कासहारा थे। अचानक स्वास्थ्य बिगड़ने पर परिजनों ने उन्हें रीवा के एक प्रतिष्ठित निजी अस्पताल में भर्ती कराया, यह पूरी उम्मीद करते हुए कि आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के बीच उनके बेटे की जान बचाई जा सकेगी। लेकिन इसके विपरीत, अस्पताल का माहौल और वहां का प्रबंध उनके लिए राहत के बजाय मानसिक प्रताड़ना और अंततः गहरी त्रासदी का केंद्र बन गया। शुरुआत में सामान्य उपचार का झांसा देने वाले संस्थान धीरे-धीरे हालात बिगड़ने पर अपने हाथ खड़े करते नजर आए, जिससे परिजनों की चिंताएं और अधिक बढ़ गईं।
संजीवन से प्रार्थना अस्पताल तक: रेफरल प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही और प्रशासनिक खामियां
परिजनों द्वारा साझा की गई दर्दभरी दास्तां के अनुसार, अक्षत को पहले संजीवन हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था, जहां से अचानक स्थिति बिगड़ने का बहाना बनाकर उन्हें बिना किसी संतोषजनक चिकित्सीय कारण या पूर्व सूचना के सीधे प्रार्थना अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया। एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल की इस भागदौड़ और उठापटक में मरीज की बेहद नाजुक और गंभीर स्थिति को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया। इस पूरी प्रक्रिया में न तो परिजनों को रेफर करने का वास्तविक कारण समझाया गया और न ही पिछले अस्पताल के मेडिकल रिकॉर्ड, टेस्ट रिपोर्ट व गंभीर चिकित्सीय स्थितियां पूरी तरह साझा की गईं। इस तरह के बार-बार रेफर करने के खेल ने निजी अस्पतालों के उस मुनाफेखोर रवैये को उजागर कर दिया है, जहां मरीजों के जीवन की कीमत पर केवल अपनी कमियों को छुपाने और औपचारिकता पूरी करने पर ध्यान दिया जाता है।

दवाओं के अत्यधिक डोज और विशेषज्ञ चिकित्सकों की अनुपस्थिति का सनसनीखेज सच
मामले की तह में जाने पर यह चौंकाने वाला तथ्य भी सामने आया कि मरीजों की जान बचाने का दावा करने वाले इन निजी संस्थानों में आपातकालीन और गंभीर स्थिति के दौरान कई बार योग्य, अनुभवी और वरिष्ठ विशेषज्ञ चिकित्सक मौके पर मौजूद ही नहीं होते हैं। जूनियर डॉक्टरों या बिना पूरी निगरानी और प्रोटोकॉल के ही गंभीर मरीजों पर मनमाने प्रयोग किए जाते हैं। अक्षत के परिवार का सीधा और गंभीर आरोप है कि उनके बेटे को निर्धारित और सुरक्षित मात्रा से कई गुना अधिक भारी खुराक (High Dose) वाली दवाएं दे दी गईं, जिनका शरीर पर बेहद विपरीत और घातक प्रभाव पड़ा। बिना सटीक डायग्नोसिस और विशेषज्ञ की सतत देखरेख के इस तरह की भारी दवाइयां देना सीधे तौर पर एक हंसते-खेलते युवा के जीवन के साथ घोर खिलवाड़ करने के समान है।
शव के साथ गैर-पारदर्शिता और अस्पताल प्रबंधन द्वारा जवाब देने से कतराना
इस पूरी त्रासदी का सबसे वीभत्स, शर्मनाक और मानवीय संवेदनाओं को पूरी तरह झकझोर देने वाला पहलू तब सामने आया जब छात्र की मृत्यु के पश्चात का समय था। आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने शोकाकुल परिजनों को स्पष्ट और सच्ची जानकारी देने के बजाय आनन-फानन में शव को बिना किसी विधिवत सूचना या सहमति के सीधे एम्बुलेंस में लोड कर बाहर भगाने की कोशिश की। जब परिजनों ने इस संदिग्ध हरकत का कड़ा विरोध किया और अस्पताल के भीतर आकर जवाब मांगना चाहा, तो डॉक्टरों और प्रबंधकों ने अपने कार्यालय के दरवाजे अंदर से बंद कर लिए और फोन उठाना पूरी तरह बंद कर दिया। अपने गुनाहों को छुपाने, तीखे सवालों से बचने और परिजनों के आक्रोश को दबाने के लिए अस्पताल परिसर में भारी मात्रा में बाउंसर और सुरक्षा कर्मियों को तैनात कर दिया गया, जिसने उनकी आपराधिक संलिप्तता और घोर असंवेदनशीलता को पूरी तरह बेनकाब कर दिया।

प्रशासन और पुलिस की भूमिका तथा न्याय की बढ़ती मांग
इस हृदयविदारक घटना के बाद रीवा शहर के नागरिकों, छात्र संगठनों और पीड़ित परिवार में न्याय पाने की मांग तीव्र हो गई है। स्थानीय पुलिस थाने में औपचारिक शिकायत दर्ज करा दी गई है और अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जिला प्रशासन और पुलिस महकमा कितनी निष्पक्षता से इस हाई-प्रोफाइल मामले की परतें उधेड़ता है। परिवार की प्रमुख मांग है कि संजीवन और प्रार्थना अस्पताल के सभी सीसीटीवी फुटेज, इलाज के दौरान दी गई दवाइयों के चार्ट, रेफरल पर्चियां और मुख्य रूप से पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट की गहराई से उच्चस्तरीय न्यायिक जांच हो। यदि इस गंभीर मामले में दोषियों के खिलाफ कड़ी विधिक और दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो रीवा की स्वास्थ्य व्यवस्था से आम जनता का बचा-कुचा भरोसा भी हमेशा के लिए टूट जाएगा।


