विंध्य की राजधानी कहे जाने वाले रीवा जिले की पहचान कभी नशीली कफ सिरप ‘कोरेक्स’ के अवैध कारोबार के चलते देश भर में बदनाम हो चुकी थी। जिला प्रशासन, पुलिस विभाग और सख्त प्रशासनिक कार्रवाई के बाद जब कोरेक्स और अन्य प्रतिबंधित नशीले पदार्थों के नेटवर्क पर नकेल कसी गई, तो तस्करों और नशे के सौदागरों ने इसके विकल्प तलाशने शुरू कर दिए। महंगी सिरप और पुलिस की पैनी नजर से बचने के लिए रीवा के युवाओं ने एक ऐसा खतरनाक और सस्ता तरीका ढूंढ निकाला है, जिसे स्थानीय स्तर पर ‘लाल परी’ का नाम दिया गया है।
यह नया नशा न केवल कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है, बल्कि यह रीवा के युवाओं की नसों में जहर की तरह घुल रहा है। बिना किसी डॉक्टर के पर्चे और प्रतिबंधित सूची से बाहर की दवाइयों का यह दुरुपयोग समाज के लिए एक भयावह संकेत है।
क्या है ‘लाल परी’ नशा और ‘स्ट्रिंग’ का खतरनाक कॉकटेल?
‘लाल परी’ असल में कोई पारंपरिक नशीला पदार्थ नहीं है, बल्कि यह बाजार में आम मिलने वाली एक दर्द निवारक (Painkiller) गोली और लोकप्रिय एनर्जी ड्रिंक ‘स्ट्रिंग’ (String) का एक खतरनाक मिश्रण है।
नशे के आदी युवक बाजार से बेहद कम कीमत में दर्द निवारक गोलियां खरीदते हैं। इसके बाद ‘स्ट्रिंग’ एनर्जी ड्रिंक की लाल रंग की बोतल में इन गोलियों को मिला दिया जाता है। स्ट्रिंग ड्रिंक का लाल रंग और गोलियों के घुलने से बने इस लिक्विड को युवाओं ने ‘लाल परी’ का नाम दिया है।
इस मिश्रण को धीरे-धीरे पीने के बाद व्यक्ति का दिमाग सुन्न (सन्न) हो जाता है। वह होश में तो रहता है, लेकिन उसका तंत्रिका तंत्र (Nervous System) इस कॉकटेल के असर से सुस्त हो जाता है।
राजस्थान से रीवा कैसे पहुंचा यह नया और सस्ता नशा?
खुफिया और स्थानीय जानकारियों के अनुसार, इस नए नशे की शुरुआत का ताल्लुक राजस्थान से जुड़ा हुआ है। रीवा और आसपास के ग्रामीण अंचलों में कृषि कार्यों, खेतों की जुताई (प्लाऊ) और अन्य निर्माण कार्यों के सिलसिले में राजस्थान से बड़ी संख्या में श्रमिक और कामगार आते-जाते रहते हैं। बताया जाता है कि इन्हीं बाहरी कामगारों और तस्करों के संपर्क में आने वाले स्थानीय नशेड़ियों को इस सस्ते और छुपे हुए नशे का यह नायाब फार्मूला मिला। चूंकि यह तरीका पारंपरिक मादक द्रव्यों की खरीद-फरोख्त जितना महंगा नहीं है, इसलिए रीवा के युवा तेजी से इसकी गिरफ्त में आते चले गए।
गैर-प्रतिबंधित और सस्ती दवाइयों को कैसे बना लिया गया है नशे का आसान जरिया?
सबसे डरावनी बात यह है कि इस नशे में इस्तेमाल होने वाली दवाएं कोई ‘एच ड्रग्स’ (H-Drugs) या प्रतिबंधित नारकोटिक्स की श्रेणी में नहीं आतीं। ये सामान्य दर्द निवारक गोलियां हैं जो हर मेडिकल स्टोर पर महज 70 से 80 रुपये में 10 गोलियों के पत्ते के रूप में आसानी से मिल जाती हैं। कोरेक्स सिरप या एमडी ड्रग्स की तुलना में यह नशा बेहद सस्ता है, जिससे चंद रुपयों में हफ्तों तक इसका असर बरकरार रखा जा सकता है। चूंकि ये दवाइयां प्रतिबंधित सूची में नहीं हैं, इसलिए पुलिस या मेडिकल स्टोर संचालकों पर सीधे तौर पर शक करना या कानूनी कार्रवाई करना कठिन हो जाता है। यही कारण है कि यह ड्रग माफियाओं के लिए पुलिस की आंखों में धूल झोंकने का सबसे आसान जरिया बन गया है।
प्रशासनिक पाबंदियों के बाद भी कैसे नए रास्ते तलाश रहे हैं रीवा के नशेड़ी?
रीवा पुलिस ने पिछले कुछ वर्षों में कोरेक्स, गांजा, ब्राउन शुगर और कफ सिरप के अवैध कारोबारियों के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई की है। कई मेडिकल स्टोर सील किए गए और बड़े सप्लायर जेल की सलाखों के पीछे पहुंचे। लेकिन जैसा कि अपराधियों की फितरत होती है, कड़ाई बढ़ते ही वे नए रास्ते तलाश लेते हैं। पुलिस ने कफ सिरप और प्रतिबंधित गोलियों पर पहरा बैठाया, तो नशेड़ियों ने नॉन-रिस्ट्रिक्टेड पेनकिलर्स का यह खतरनाक विकल्प ढूंढ लिया। यह स्थिति साबित करती है कि केवल पुलिसिया कार्रवाई से नशा नहीं मिटेगा, बल्कि इसके लिए सामाजिक जागरूकता और मेडिकल स्टोर्स की सख्त निगरानी बेहद जरूरी है।
युवाओं के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को किस तरह अंदर से खोखला कर रहा है यह नया कॉकटेल?
‘लाल परी’ जैसे घरेलू और मेडिकल उत्पादों के मिश्रण से बनने वाले ये नए नशे युवाओं के लिवर, किडनी और मस्तिष्क को अंदर से खोखला कर रहे हैं। स्ट्रिंग जैसे कैफीन युक्त एनर्जी ड्रिंक के साथ पेनकिलर्स का ओवरडोज दिल की धड़कनें तेज कर सकता है और अचानक कार्डियक अरेस्ट का खतरा भी बढ़ा सकता है।
परिवारों, अभिभावकों और शिक्षकों को अपने बच्चों और युवाओं की गतिविधियों पर पैनी नजर रखनी होगी। यदि कोई युवा लगातार स्ट्रिंग या ऐसी ही कोल्ड ड्रिंक्स का अजीब तरीके से सेवन कर रहा है और सुस्त रहता है, तो यह खतरे की घंटी है।


