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October 28, 2026 10:38 pm

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ब्रेकिंग न्यूज़! GST की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’: 4 स्लैब खत्म, 28% GST भी गायब

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केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए जीएसटी (GST) टैक्स स्लैब में बड़ा बदलाव किया है। अब 4 स्लैब (5%, 12%, 18% और 28%) की जगह सिर्फ दो स्लैब रहेंगे: 5% और 18%। इस फैसले से आम आदमी के लिए कई चीजें सस्ती हो जाएंगी, जैसे कि दैनिक उपयोग की वस्तुएं, कुछ इलेक्ट्रॉनिक्स, और छोटी गाड़ियां। सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव व्यक्तिगत स्वास्थ्य और जीवन बीमा पर 18% जीएसटी को खत्म करके ‘शून्य’ करना है। यह फैसला 22 सितंबर से लागू होगा।

क्या है नए स्लैब में खास?
जीएसटी काउंसिल की 56वीं मीटिंग में यह फैसला लिया गया, जिसका मकसद टैक्स सिस्टम को सरल और आम लोगों के लिए फायदेमंद बनाना है।

  • 5% स्लैब: इसमें अब साबुन, शैंपू जैसे रोजमर्रा के सामान, और खेती-बागवानी से जुड़ी मशीनें शामिल होंगी।
  • 18% स्लैब: इस स्लैब में एसी, कार और ऑटो पार्ट्स जैसी चीजें शामिल होंगी, जो पहले 28% स्लैब में थीं।
  • 40% विशेष दर: लग्जरी आइटम, बड़ी कारें, 350cc से ऊपर की मोटरसाइकिलें, और तंबाकू जैसे उत्पादों पर अब 28% की जगह 40% की नई और विशेष जीएसटी दर लागू होगी।
  • GST फ्री (0%): दूध, रोटी, पराठा, छेना जैसे कई फूड आइटम, और सबसे महत्वपूर्ण, व्यक्तिगत स्वास्थ्य और जीवन बीमा प्रीमियम अब पूरी तरह से टैक्स-फ्री होंगे। इसके अलावा, 33 जीवन रक्षक दवाएं भी टैक्स फ्री की गई हैं।

इंश्योरेंस प्रीमियम पर बचत का गणित
सरकार के इस कदम से पॉलिसीधारकों को सीधे तौर पर आर्थिक फायदा होगा। अब तक बीमा प्रीमियम पर 18% जीएसटी लगता था।

  • उदाहरण: यदि किसी व्यक्ति का मासिक बीमा प्रीमियम 20,000 रुपये था, तो उस पर 18% की दर से 3,600 रुपये जीएसटी देना होता था। कुल भुगतान 23,600 रुपये होता था।
  • नए बदलाव के बाद: 22 सितंबर से जीएसटी जीरो होने के बाद, अब सिर्फ बेस प्रीमियम (20,000 रुपये) का ही भुगतान करना होगा। यह 3,600 रुपये की सीधी बचत है, जो बीमा को आम लोगों के लिए और भी किफायती बनाएगी। यह बदलाव सभी व्यक्तिगत लाइफ इंश्योरेंस, हेल्थ इंश्योरेंस और टर्म प्लान पर लागू होगा।

क्या बीमा कंपनियां ग्राहकों पर बोझ बढ़ा सकती हैं?

  • इंश्योरेंस प्रीमियम पर जीएसटी हटने के बाद एक सवाल उठ रहा है कि क्या कंपनियां इसका बोझ ग्राहकों पर डाल सकती हैं? दरअसल, बीमा कंपनियां ग्राहकों से जीएसटी वसूलती थीं और अपने इनपुट खर्चों (जैसे ऑफिस का किराया, एजेंट कमीशन) पर दिए गए जीएसटी से इसे एडजस्ट करती थीं। इसे इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) कहते हैं।
  • अब जब प्रीमियम पर जीएसटी जीरो हो गया है, तो कंपनियां ग्राहकों से कोई जीएसटी नहीं लेंगी। ऐसे में उन्हें अपने इनपुट खर्चों पर दिए गए टैक्स का आईटीसी नहीं मिलेगा। इसका मतलब है कि उन्हें यह लागत खुद वहन करनी होगी। ऐसी संभावना है कि कंपनियां इस अतिरिक्त लागत को बेस प्रीमियम में जोड़कर ग्राहकों से वसूल सकती हैं। हालांकि, वित्त मंत्री ने कहा है कि वे सुनिश्चित करेंगी कि इस फैसले का पूरा लाभ ग्राहकों तक पहुंचे।

GST रिफॉर्म्स पर PM मोदी और बीमा कंपनियों की राय

  • इस ऐतिहासिक फैसले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स (पहले ट्विटर) पर खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि जीएसटी काउंसिल ने केंद्र सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जिससे आम जनता, किसान, MSME और मध्यम वर्ग को फायदा होगा। यह नागरिकों की जिंदगी को बेहतर बनाएगा और कारोबार करना आसान करेगा।
  • बीमा सेक्टर ने भी इस कदम को ‘ऐतिहासिक’ बताया है। बजाज आलियांज जनरल इंश्योरेंस के सीईओ डॉ. तपन सिंघल ने कहा कि यह निर्णय स्वास्थ्य देखभाल सुरक्षा को किफायती बनाएगा, खासकर ऐसे समय में जब चिकित्सा लागत बढ़ रही है। इससे देश की स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।

क्या-क्या सस्ता हुआ?
ज्यादातर वो चीजें जो पहले 12% और 28% के स्लैब में थीं, अब सस्ते हो गई हैं क्योंकि उन्हें 5% या 18% के स्लैब में शिफ्ट कर दिया गया है।

1. रोज़मर्रा की चीजें (5% स्लैब में)

साबुन, शैंपू, टूथपेस्ट, हेयर ऑयल: ये चीजें जो पहले 18% के स्लैब में थीं, अब 5% के स्लैब में आ गई हैं, जिससे सीधे-सीधे 13% की बचत होगी।

  • घी, मक्खन, पनीर, नमकीन, भुजिया: ये सभी फूड आइटम्स जो पहले 12% जीएसटी पर थे, अब 5% स्लैब में हैं।
  • दवाइयां और मेडिकल उपकरण: कई जरूरी दवाएं, जिनमें कैंसर और गंभीर बीमारियों की दवाएं भी शामिल हैं, अब टैक्स-फ्री (0%) होंगी। थर्मामीटर, डायग्नोस्टिक किट और ग्लूकोमीटर जैसी चीजें भी 12% या 18% से घटकर 5% पर आ गई हैं।
  • कॉस्मेटिक और स्वास्थ्य सेवाएं: जिम, सैलून, नाई की दुकान और योग सेंटरों पर जीएसटी 18% से घटाकर 5% कर दिया गया है।
  • घरेलू उपकरण और रसोई के सामान: बर्तन, सिलाई मशीनें, और प्लास्टिक के सामान भी 18% से 5% के दायरे में आ गए हैं।

2. ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स (18% स्लैब में)

  • कारें और बाइक: छोटी कारें (पेट्रोल 1200cc, डीजल 1500cc तक) और 350cc तक की मोटरसाइकिलें जो पहले 28% जीएसटी पर थीं, अब 18% के स्लैब में आएंगी। इससे इनकी कीमतें 10% तक कम हो सकती हैं।
  • होम अप्लायंसेज: एयर कंडीशनर (AC), टेलीविजन (32 इंच से ऊपर), रेफ्रिजरेटर और डिशवॉशिंग मशीन पर जीएसटी 28% से घटाकर 18% कर दिया गया है।
  • ऑटो पार्ट्स: सभी प्रकार के ऑटो पार्ट्स पर भी जीएसटी 28% से घटाकर 18% कर दिया गया है, जिससे गाड़ियों की रिपेयरिंग सस्ती होगी।

3. अन्य सामान और सेवाएं

  • स्वास्थ्य और जीवन बीमा: सबसे बड़ा बदलाव व्यक्तिगत स्वास्थ्य और जीवन बीमा पर हुआ है, जिस पर पहले 18% जीएसटी लगता था, अब वह पूरी तरह से टैक्स-फ्री (0%) हो गया है।
  • खेती से जुड़े उपकरण: ट्रैक्टर, हार्वेस्टिंग मशीनें, और खेती-बागवानी के उपकरण 12% से 5% के स्लैब में आ गए हैं।
  • होटल बुकिंग: 7500 रुपये प्रति दिन तक के होटल के कमरों की बुकिंग पर जीएसटी 12% से घटाकर 5% कर दिया गया है।

क्या-क्या महंगा हुआ?
नए बदलावों में कुछ ऐसी चीजें भी हैं जो अब महंगी हो जाएंगी क्योंकि उन पर जीएसटी की दर बढ़ा दी गई है।

  • लग्जरी और सिन गुड्स: तंबाकू, पान मसाला, गुटखा, और लग्जरी कारों जैसे सामान पर अब 28% की जगह 40% की विशेष दर लगाई गई है।
  • खेल और मनोरंजन: कैसिनो, रेस क्लब और आईपीएल जैसे बड़े खेल इवेंट्स के टिकट पर जीएसटी 28% से बढ़ाकर 40% कर दिया गया है।

कुछ चीजें जो GST-फ्री हुईं (0%)

  • दूध, रोटी, पराठा और छेना
  • व्यक्तिगत स्वास्थ्य और जीवन बीमा
  • 33 जीवन रक्षक दवाएं
  • पेंसिल, इरेज़र, नोटबुक, और स्कूल से जुड़ी कुछ अन्य स्टेशनरी

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि जीएसटी में यह बदलाव 22 सितंबर से लागू हो जाएंगे, जिससे दिवाली के त्योहार से पहले आम जनता को काफी राहत मिलने की उम्मीद है।

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