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October 28, 2026 2:12 pm

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रीवा ब्रेकिंग: 20 मिनट में 14 गोलियों का ओवरडोज! रीवा के इन 2 अस्पतालों पर फूटा पिता का गुस्सा, थाने में शिकायत दर्ज!

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मध्य प्रदेश के रीवा जिले में चिकित्सा जगत को कटघरे में खड़ा करने वाला एक और झकझोर देने वाला मामला प्रकाश में आया है। शहर के समान थाना क्षेत्र अंतर्गत इलाज के दौरान एक युवा, अक्षत शुक्ला की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने प्रशासनिक व्यवस्था और निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। मृतक के पिता ने दो प्रमुख निजी अस्पतालों—संजीवनी और प्रार्थना अस्पताल—के डॉक्टरों और प्रबंधकों पर इलाज के नाम पर घोर लापरवाही बरतने के गंभीर आरोप लगाए हैं। इस सनसनीखेज मामले में पीड़ित पिता ने पुलिस थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराते हुए उच्चस्तरीय जांच और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

संजीवनी अस्पताल में भर्ती और डॉक्टर मुकेश तिवारी का शुरुआती आश्वासन
घटना की शुरुआत तब हुई जब अक्षत की तबीयत अचानक बिगड़ गई। चिंतित परिजन उसे तुरंत रीवा के संजीवनी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां शाम करीब 5:30 बजे उसे भर्ती कराया गया। अस्पताल में उनका इलाज कर रहे डॉक्टर मुकेश तिवारी ने परिजनों को ढांढस बंधाते हुए कहा था कि घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है, मरीज की स्थिति नियंत्रण में है और वह सुबह तक पूरी तरह ठीक हो जाएगा। डॉक्टर के इस आश्वासन से परिवार को शुरुआती राहत मिली और उन्हें लगा कि उनके बेटे को सही चिकित्सीय देखरेख मिल रही है। लेकिन किसी को यह अंदाजा नहीं था कि कुछ ही घंटों के भीतर यह उम्मीद एक गहरी त्रासदी में बदल जाएगी।

20 मिनट के भीतर टीबी की 14 दवाएं देने का सनसनीखेज आरोप
मामले में सबसे चौंकाने वाला और गंभीर मोड़ तब आया जब पिता सुभाष शुक्ला ने अस्पताल की चिकित्सा प्रक्रिया पर सीधे सवाल उठाए। पिता के अनुसार, रात करीब 3 बजे तक उनके बेटे की स्थिति ठीक थी, लेकिन उसके बाद अचानक उसे उल्टियां होने लगीं। आरोप है कि इसी दौरान महज 20 मिनट के अंतराल में अक्षत को टीबी की 14 भारी-भरकम दवाएं दे दी गईं, जिसके तुरंत बाद उसकी हालत तेजी से बिगड़ने लगी। पिता का यह सवाल अत्यंत तर्कसंगत और गंभीर है कि जब अस्पताल द्वारा कुछ घंटे पहले की गई मेडिकल रिपोर्ट में टीबी की बीमारी का दूर-दूर तक कोई जिक्र या संकेत नहीं था, तो आखिर किस चिकित्सीय protocol या आधार पर उसे इतनी बड़ी मात्रा में टीबी की दवाएं दे दी गईं।

बिना परिजनों को सूचित किए प्रार्थना अस्पताल शिफ्ट करने का मामला
लापरवाही का सिलसिला यहीं नहीं थमा। परिजनों का यह भी आरोप है कि जब अक्षत की हालत बेहद गंभीर हो गई, तो संजीवनी अस्पताल के प्रबंधन ने उन्हें उचित विश्वास में लिए बिना और बिना किसी स्पष्ट सूचना के, चुपचाप उसे प्रार्थना अस्पताल में स्थानांतरित (shift) कर दिया। प्रार्थना अस्पताल ले जाने के बाद उसे वेंटिलेटर और ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। इलाज के इस संदिग्ध और संदिग्ध दौर के दौरान लगातार बढ़ते मेडिकल बिल, मरीजों के जीवन के साथ खिलवाड़ और जवाब देने से बचने की प्रवृत्ति ने निजी संस्थानों के मानवीय दृष्टिकोण पर बड़ा धब्बा लगा दिया है।

सीसीटीवी फुटेज, मेडिकल रिकॉर्ड की मांग और पुलिस प्रशासन की कार्रवाई
इस दुखद घटना के बाद शोकाकुल पिता ने न्याय की गुहार लगाते हुए स्थानीय समान थाने में लिखित शिकायत दी है। उन्होंने मांग की है कि दोनों अस्पतालों के आंतरिक सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित कर उसकी गहन जांच की जाए, क्योंकि अस्पताल प्रबंधन ने उन्हें कैमरों की रिकॉर्डिंग दिखाने से इंकार कर दिया था। पिता चाहते हैं कि दवाएं देने के सटीक समय, डॉक्टर के निर्देश और पूरे मेडिकल रिकॉर्ड की सत्यता की जांच हो ताकि यह स्पष्ट हो सके कि मौत के वास्तविक कारण क्या थे। वहीं, दूसरी ओर दोनों अस्पतालों के प्रबंधनों ने अपने ऊपर लगे तमाम आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है।

समान थाना प्रभारी आशीष मिश्रा ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि पीड़ित परिवार की ओर से लिखित शिकायत प्राप्त हो चुकी है और मामले को विधिवत विवेचना (investigation) में ले लिया गया है। पुलिस सभी पहलुओं, मेडिकल दस्तावेजों और बयानों की बारीकी से जांच कर रही है, और जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही अग्रिम वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

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