डिस्प्ले मोड (DISPLAY MODE) पढ़ने के लिए अपनी पसंदीदा थीम चुनें

October 31, 2026 5:52 pm

Home » रीवा » सीधी ई-टीपी स्कैम की गूंज अब रीवा-मऊगंज में: खनिज विभाग की छापेमारी से हड़कंप, दर्जनों क्रेशरों को नोटिस

सीधी ई-टीपी स्कैम की गूंज अब रीवा-मऊगंज में: खनिज विभाग की छापेमारी से हड़कंप, दर्जनों क्रेशरों को नोटिस

SHARE:

सीधी जिले में सामने आए चर्चित ई-टीपी (ई-ट्रांजिट पास) फर्जीवाड़े के तार अब विंध्य के अन्य जिलों तक फैल चुके हैं। इसका असर रीवा और मऊगंज जिले में भी साफ तौर पर दिखाई देने लगा है, जहां जिला खनिज प्रशासन ने अवैध खनन, भंडारण और परिवहन में संलिप्त कारोबारियों के खिलाफ शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। विभागीय जांच में बड़े पैमाने पर नियमों की अनदेखी और गंभीर अनियमितताएं पाए जाने के बाद रीवा एवं मऊगंज के दर्जनों क्रेशर, खदान और खनिज भंडारण केंद्र संचालकों को नोटिस जारी किए गए हैं। प्रशासन की इस सख्त कार्रवाई से स्थानीय खनिज माफियाओं और कारोबारियों में हड़कंप मच गया है।

ई-टीपी फर्जीवाड़े की गूंज और विंध्य में खनिज विभाग की सख्ती
पड़ोसी जिले सीधी में ई-टीपी फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ होने के बाद विंध्य क्षेत्र के प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया था। इसीता और सत्यता की पड़ताल करते हुए रीवा और मऊगंज जिले में भी खनिज गतिविधियों की औचक व मैदानी जांच तेज कर दी गई है। खनिज विभाग द्वारा की गई ताबड़तोड़ जांच के दौरान जिले में संचालित कई क्रेशर इकाइयों, स्टोन खदानों और खनिज भंडारण केंद्रों पर भारी गड़बड़ियां पाई गईं।

शुक्रवार को खनिज विभाग ने नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले इन सभी कारोबारियों को औपचारिक रूप से नोटिस जारी कर दिया है। विभाग ने सभी संबंधित संचालकों को निर्देश दिए हैं कि वे सात दिनों के भीतर अपने तमाम वैध दस्तावेज, स्टॉक रजिस्टर और स्पष्टीकरण के साथ पक्ष रखें। इस पूरी प्रशासनिक कार्रवाई का नेतृत्व कर रहे जिला अधिकारियों का साफ कहना है कि खनिज संपदा की अवैध निकासी और सरकारी राजस्व को चूना लगाने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

स्वीकृत क्षेत्र से बाहर अवैध खनन और नियमों की अनदेखी
विभागीय जांच टीमों द्वारा रीवा और मऊगंज के विभिन्न ग्रामीण व शहरी इलाकों में संचालित खदानों का भौतिक निरीक्षण किया गया। इस दौरान यह बात सामने आई कि कई खदान संचालक स्वीकृत पट्टा क्षेत्र (Approved Lease Area) की सीमाओं को लांघकर बाहर अवैध रूप से उत्खनन का कार्य कर रहे थे। खनन पट्टे की वैध शर्तों के विपरीत जाकर की जा रही इस कटाई से पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंच रहा है।

जांच में मुख्य रूप से निम्नलिखित गंभीर अनियमितताएं उजागर हुई हैं:

पट्टे की निर्धारित भूमि से बाहर जाकर बड़े पैमाने पर अवैध उत्खनन करना। खनिज भंडारण और निकासी का कोई भी सटीक और नियमित हिसाब-किताब नहीं रखना। खदानों की सही सीमाओं को दर्शाने के लिए निर्धारित पिलर या फेंसिंग की व्यवस्था न होना।
माइनिंग प्लान के मुताबिक अनिवार्य पौधारोपण न करना और प्रदूषण नियंत्रण के नियमों को ताक पर रखना। खनिज ले जाने वाले वाहनों के लिए निर्धारित वैध ई-टीपी और चालान प्रक्रियाओं का पालन न करना।

मध्य प्रदेश गौण खनिज नियम 1996 के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई
खनिज विभाग द्वारा जारी किए गए नोटिसों में कानूनी प्रावधानों का कड़ाई से हवाला दिया गया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह पूरी कार्रवाई मध्य प्रदेश गौण खनिज नियम, 1996 के नियम 30 (11), 17 (2), नियम 18 और नियम 50 (1) के तहत की जा रही है। इन नियमों के अंतर्गत खनिज का अवैध भंडारण, बिना परमिट परिवहन और पट्टे की शर्तों का उल्लंघन करना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।

नोटिस प्राप्त करने वाले सभी संचालकों को चेतावनी दी गई है कि वे तयशुदा सात दिनों की समयावधि के भीतर अपना जवाब और संबंधित साक्ष्य प्रस्तुत करें। यदि निर्धारित समय-सीमा के भीतर संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दिया जाता है, तो विभाग बिना किसी विलंब के उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर एकपक्षीय और कठोर वैधानिक कार्रवाई करेगा, जिसके तहत भारी वित्तीय जुर्माना लगाने के साथ-साथ लाइसेंस निरस्तीकरण और खदान सीज करने की कार्रवाई भी की जा सकती है।

रीवा और मऊगंज में नोटिस पाने वाले क्रेशर व खदान संचालकों की सूची
खनिज विभाग द्वारा रीवा और मऊगंज में की गई इस व्यापक जांच के बाद क्षेत्र के लगभग सभी प्रमुख क्रेशर और खदान संचालकों को शिकंजे में ले लिया गया है। जिन कारोबारियों को नोटिस जारी किए गए हैं, उनकी विस्तृत सूची इस प्रकार है:

रीवा जिले के चिन्हित क्रेशर एवं खदान संचालक:
अस्मिता स्टोन क्रेशर, राम सिंह, आर मिनिरल्स, कपीश स्टोन, संजीव मिश्रा, अरुणेंद्र प्रसाद पयासी, पवन पाठक, राजेंद्र सिंह, रत्नेश द्विवेदी, संतोष कुमार तिवारी, नागेश्वर सिंह, विशाल शुक्ला, ओम स्टोन क्रेशर, राजेंद्र यादव, संकल्प स्टोन, तथागत स्टोन, राजमणि यादव, शिवेंद्र सिंह, ललित स्टोन, महाकालेश्वर, चक्रमणि शुक्ला, त्रिवेणी स्टोन, बिहारी लाल, शमशेर सिंह, अजय स्टोन, मेहमान केसिंग, सुशील कुमार तिवारी, शारदा प्रसाद पांडे, कल्पना तिवारी, हीरालाल यादव, संजय पाठक, देवेंद्र कुमार शुक्ला, प्रकाश चंद्र गोयल, उषा क्वालिटी, मोबीन खान और अनिल कुमार पटेल।

मऊगंज जिले के चिन्हित क्रेशर एवं खदान संचालक:
उदयपुर सप्लायर, आलोक तिवारी, आशुतोष मिश्रा, कृष्ण कुमार सिंह, विंध्यवासिनी स्टोन, महा मृत्युंजय एंटरप्राइजेज, रीवा मिनरल्स, स्काई लाइट, प्रकाश दीप मिनरल्स, रेनू सिंह, महामाया स्टोन, जय महाकाल माइंस, कामाख्या इंटरप्राइजेज, बालाजी माइंस और महालक्ष्मी सहित क्षेत्र के अन्य सभी संचालित क्रेशर व खदान संचालक।

विभागीय निगरानी और भविष्य की सख्त प्रशासनिक कार्रवाई
खनिज अधिकारी रवि पटेल के अनुसार, प्रशासनिक निरीक्षण के दौरान जो तथ्य सामने आए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं। खनिज भंडारण अनुज्ञप्ति (Mineral Storage License) के नियमों का सरेआम उल्लंघन किया जा रहा था। स्टॉक रजिस्टर मेंटेन करने से लेकर परिवहन संबंधी अभिलेखों के संधारण में भारी कमियां पाई गईं। इस तरह की कार्यप्रणाली सीधे तौर पर शासन के राजस्व को नुकसान पहुंचाती है और वैध कारोबारियों के साथ भी अन्याय है।

ई-टीपी फर्जीवाड़े और इस ताजा कार्रवाई के बाद रीवा और मऊगंज में खनिज कारोबार की पूरी कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है। जानकारों का मानना है कि यदि प्रशासन ने इस बार कड़ाई से रुख नहीं बदला, तो अवैध उत्खनन का यह काला कारोबार और अधिक फैलता जाएगा। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि नोटिस मिलने के बाद ये संचालक क्या जवाब दाखिल करते हैं और विभाग इन पर कितना भारी जुर्माना या दंडात्मक कदम उठाता है।

अन्य खबरें

राज्य

शहर चुनें