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October 31, 2026 6:32 pm

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रीवा सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में NABH की जांच : लिफ्ट में फंसी जांच टीम, बिना लाइसेंस MRI व सीटी स्कैन, रेडिएशन मशीनों के संचालन से हड़कंप

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रीवा स्थित सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में एनएबीएच (NABH) सर्टिफिकेट के रिन्युअल के लिए पहुंची तीन सदस्यीय केंद्रीय टीम के निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की पोल खुलकर सामने आ गई है। अस्पताल में संचालित कई महत्वपूर्ण रेडिएशन मशीनें बिना वैध लाइसेंस के चल रही थीं, जिनमें सोनोग्राफी मशीनों के लाइसेंस की अवधि भी समाप्त हो चुकी थी। इसके अलावा सीटी स्कैन, एमआरआई और कैथ लैब जैसी संवेदनशील मशीनें भी बिना अनुज्ञप्ति के संचालित पाई गईं। जांच के दौरान लिफ्ट के अचानक बंद होने से टीम के सदस्य आधे घंटे तक अंदर फंसे रहे, जबकि फायर सेफ्टी ट्रायल और बिल्डिंग के स्लोप निर्माण में भी भारी खामियां उजागर हुईं।

रीवा सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में एनएबीएच निरीक्षण और चौंकाने वाले खुलासे
रीवा के प्रतिष्ठित सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में एनएबीएच (National Accreditation Board for Hospitals & Healthcare Providers) का सर्टिफिकेट रीन्यु कराने के लिए तीन सदस्यीय विशेष टीम ने औचक निरीक्षण किया। इस टीम में डॉ. सुकुमार संजीव साल्यांकर, मिस किरण मैरी रेड्डी और डॉ. सुनील भंडेरकर शामिल रहे, जिन्होंने सुबह 8:30 बजे से ही अस्पताल के चप्पे-चप्पे की बारीकी से जांच शुरू कर दी। टीम के सदस्यों ने सभी मानकों की ऑनलाइन फीडिंग टैबलेट के माध्यम से सीधे एनएबीएच की आधिकारिक वेबसाइट पर दर्ज की।

हालांकि, इस निरीक्षण के दौरान अस्पताल प्रबंधन के दावों की हवा निकल गई और एक के बाद एक कई गंभीर प्रशासनिक व तकनीकी लापरवाहियां सामने आने लगीं। अस्पताल में मरीजों की सुविधाओं से लेकर सुरक्षा मानकों तक हर मोर्चे पर भारी खामियां देखने को मिलीं, जिससे विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

बिना लाइसेंस के चल रहीं रेडिएशन मशीनें, सीटी स्कैन और कैथ लैब पर सवाल
निरीक्षण के दौरान सबसे बड़ा खुलासा रेडियोलॉजी विभाग में हुआ, जहां टीम ने सोनोग्राफी मशीनों के दस्तावेजों की जांच की। जांच में पाया गया कि पीसीपीएनडीटी (PCPNDT) अधिनियम के तहत सोनोग्राफी मशीनों का लाइसेंस समय पर रीन्यु ही नहीं कराया गया था और वह एक सप्ताह पहले ही एक्सपायर हो चुका था।

स्थिति तब और गंभीर हो गई जब टीम ने सीटी स्कैन, एमआरआई और कार्डियोलॉजी विभाग की कैथ लैब के रजिस्ट्रेशन व दस्तावेजों की जांच की। इन सभी अत्याधुनिक और संवेदनशील रेडिएशन मशीनों के संचालन के लिए आवश्यक वैध लाइसेंस या पंजीकरण का कोई रिकॉर्ड मौके पर नहीं मिला। टीम ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार की रेडिएशन मशीन का संचालन बिना वैध अनुज्ञप्ति के नहीं किया जा सकता, जो कि सीधे तौर पर नियमों का खुला उल्लंघन है।

लिफ्ट में आधे घंटे फंसे रहे टीम के सदस्य, गंभीर सुरक्षा खामियां
जांच प्रक्रिया के दौरान अस्पताल की लचर व्यवस्था का एक और खौफनाक नजारा तब देखने को मिला जब एनएबीएच टीम के सदस्य निरीक्षण के लिए लिफ्ट में सवार हुए। लिफ्ट जैसे ही नीचे उतरने लगी, वह अचानक बीच रास्ते में ही तकनीकी खराबी के कारण बंद हो गई।

लिफ्ट के अंदर न तो कोई आपातकालीन राहत या बचाव की सुविधा काम कर रही थी और न ही अलार्म बज रहा था। टीम के सदस्य करीब आधे घंटे तक अंधेरे में लिफ्ट के भीतर फंसे रहे। अंततः जब बाहर हल्ला मचा और अस्पताल के स्टाफ को इसकी भनक लगी, तब ठेका कर्मचारियों को बुलाया गया और भारी मशक्कत के बाद लिफ्ट का दरवाजा खोलकर सदस्यों को बाहर निकाला गया। इसके अलावा, ग्राउंड फ्लोर पर रखे स्ट्रेचरों पर गद्दे तक उपलब्ध नहीं थे, जिस पर टीम ने गहरी नाराजगी व्यक्त की।

फायर सेफ्टी ट्रायल फेल और स्ट्रेचर स्लोप की खतरनाक बनावट
अस्पताल के बुनियादी ढांचे (Infrastructure) की पड़ताल में भी गंभीर तकनीकी दोष पाए गए:

फायर सेफ्टी सिस्टम फेल: करोड़ों रुपये की लागत से लगाए गए आधुनिक फायर फाइटिंग सिस्टम की जब टीम ने परख की, तो कर्मचारियों से आग बुझाने का डेमो दिखाने को कहा गया। कर्मचारियों ने पाइप खींचकर पानी चालू किया, लेकिन पाइप में पर्याप्त प्रेशर ही नहीं आया, जिससे आपातकालीन आग बुझाने के इंतजामों की पोल खुल गई।

खतरनाक रैंप/स्लोप ढलान: स्ट्रेचर को ले जाने के लिए बनाए गए स्लोप की ढलान मानक स्तर से अत्यधिक है। टीम ने स्ट्रेचर चलाकर परीक्षण किया और पाया कि यदि वार्ड ब्वाय या परिजनों के हाथ से थोड़ी भी चूक हो जाए, तो स्ट्रेचर अनियंत्रित होकर सीधे नीचे गिर जाएगा, जिससे मरीज की जान जा सकती है।

निरीक्षण को प्रभावित करने के लिए मरीजों को हटाने और प्रबंधन की लीपापोती
एनएबीएच टीम के निरीक्षण को मैनेज करने के लिए अस्पताल प्रबंधन द्वारा पहले से ही लीपापोती की तैयारियां की गई थीं। ओपीडी में मरीजों की भारी भीड़ को नियंत्रित करने के बहाने अधिकांश सामान्य मरीजों को सुपर स्पेशलिटी से हटाकर संजय गांधी अस्पताल भेज दिया गया था, जिससे सुपर स्पेशलिटी की ओपीडी में अचानक मरीजों की संख्या चौथाई रह गई और सब कुछ व्यवस्थित नजर आने लगा।

अक्सर टूटी-फूटी हालत में मिलने वाली व्हीलचेयरों की जगह निरीक्षण वाले दिन नई-नवेली दर्जनों व्हीलचेयर प्रदर्शित कर दी गईं। यही नहीं, एनसीएल से प्राप्त दो कार्डियक आईसीयू एम्बुलेंस, जो सामान्यतः संजय गांधी अस्पताल परिसर में खड़ी रहती हैं, उन्हें भी विशेष रूप से निरीक्षण के दौरान दिखाने के लिए सुपर स्पेशलिटी परिसर में लाकर खड़ा कर दिया गया था। हालांकि, सतर्क टीम ने एक-एक पहलू की गहराई से जांच कर इन तमाम कमियों को अपने रिकॉर्ड में दर्ज कर लिया।

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