रीवा जिले के स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में पिछले कुछ महीनों के दौरान निजी अस्पतालों से जुड़ी कई गंभीर घटनाएं, तकनीकी हादसे, इलाज में लापरवाही के आरोप और प्रशासनिक शिकायतें सामने आई हैं। जहाँ एक ओर शासकीय संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय (SGMH) में किसी भी दुखद घटना पर तुरंत प्रशासनिक और राजनीतिक हड़कंप मच जाता है, वहीं दूसरी ओर निजी चिकित्सा संस्थानों में सामने आ मामलों पर जांच और दंडात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया काफी धीमी नजर आ रही है। नेशनल अस्पताल, बालाजी अस्पताल, भगवती अस्पताल और प्रार्थना अस्पताल जैसे संस्थानों से जुड़े मामलों में स्थानीय निवासियों और पीड़ित परिवारों द्वारा लगातार निष्पक्ष जांच की मांग उठाई जा रही है।
नेशनल अस्पताल हादसा: लिफ्ट गिरने से मरीज की मौत का मामला

रीवा के अमहिया/समान क्षेत्र स्थित नेशनल अस्पताल में एक गंभीर हादसा दर्ज किया गया, जिसमें इलाज कराने आए मरीज की जान चली गई।
घटना का क्रम और जांच स्थिति:
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पीड़ित मरीज: अमरपाटन क्षेत्र के लालपुर निवासी 52 वर्षीय सुरेश सेन को गले की चोट के ऑपरेशन के लिए नेशनल अस्पताल लाया गया था।
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दुर्घटना: मरीज को इलाज के लिए ऊपरी मंजिल पर ले जाते समय अस्पताल की लिफ्ट अचानक टूटकर नीचे गिर गई। इस हादसे में मरीज लिफ्ट की संरचना में फंस गया और उसकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।
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प्रशासिनक कदम: घटना के तत्काल बाद जिला प्रशासन और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) की संयुक्त टीम ने मौके का निरीक्षण किया।
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जांच निष्कर्ष: स्वास्थ्य विभाग की जांच में लिफ्ट की खराबी को एक ‘तकनीकी खामी’ (Technical Issue) करार दिया गया। अस्पताल प्रबंधन को लिफ्ट दुरुस्त करने और 24 घंटे ऑपरेटर तैनात करने का अल्टीमेटम देकर मामला प्रशासनिक फाइलों में दर्ज कर लिया गया, जबकि पीड़ित पक्ष अस्पताल का लाइसेंस रद्द करने और सख्त कानूनी दंडात्मक कार्रवाई की मांग कर रहा था।
बालाजी अस्पताल विवाद: ऑपरेशन के बाद महिला की मौत का मामला

समान थाना क्षेत्र के अंतर्गत संचालित बालाजी अस्पताल में इलाज कराने आई एक महिला मरीज की लंबे समय तक चले इलाज और उसके बाद हुई दुखद मृत्यु ने स्थानीय स्तर पर काफी तूल पकड़ा।
मुख्य बिंदु:
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पीड़िता और आरोप: अजगहरा गांव की निवासी श्रीमती मिथिलेश सिंह ने बालाजी अस्पताल के संबंधित चिकित्सक डॉ. शुभम मिश्रा पर ऑपरेशन में गंभीर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया था।
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दीर्घकालिक परेशानी: परिजनों के अनुसार, गलत ऑपरेशन के कारण महिला लगभग 11 महीनों तक असहनीय शारीरिक पीड़ा से जूझती रही। पीड़िता ने इंदौर, भोपाल और दिल्ली तक के चक्कर लगाए, लेकिन स्वास्थ्य में सुधार नहीं हुआ।
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शिकायत का माध्यम: महिला द्वारा प्रशासनिक जनसुनवाई और सीएम हेल्पलाइन में भी आवेदन दर्ज कराया गया था।
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अंतिम परिणति: लंबे समय तक इलाज के दर्द और मानसिक तनाव से परेशान होकर महिला ने अपने गृह क्षेत्र में आत्मघाती कदम उठा लिया। इस घटना के बाद परिजनों ने चिकित्सक पर सख्त धाराओं में कार्रवाई की मांग की, जिस पर विभागीय स्तर पर विस्तृत जांच प्रक्रिया जारी होने की बात कही गई।
भगवती अस्पताल प्रकरण: बिल भुगतान और विवादित ऑडियो की शिकायत

रीवा के भगवती अस्पताल का नाम उस समय विवादों में आया जब एक मरीज के परिजनों ने बिलिंग प्रक्रिया और कथित अभद्र व्यवहार को लेकर कलेक्टर कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई।
मामले की प्रमुख बातें:
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पीड़ित परिवार: मऊगंज जिले के धौसढ़ निवासी ललन सोंधिया को इलाज के लिए भगवती अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
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भारी बिल और वसूली का आरोप: मरीज की पत्नी प्रमिला सोंधिया का आरोप था कि अस्पताल प्रबंधन उनसे ₹7,61,000 की राशि पहले ही वसूल चुका था और इसके बाद भी ₹4,30,000 की अतिरिक्त मांग की जा रही थी।
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विवादित ऑडियो: परिजनों ने जिला प्रशासन को एक ऑडियो रिकॉर्डिंग सौंपी, जिसमें कथित तौर पर संबंधित चिकित्सक डॉ. दिनेश पटेल द्वारा बिल न चुकाने पर अनुचित बातें कहे जाने का दावा किया गया।
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प्रशासनिक स्थिति: परिजनों द्वारा जनसुनवाई में दिए गए आवेदन के आधार पर स्वास्थ्य विभाग को मामले की जांच सौंपी गई है, हालांकि अभी तक अस्पताल के लाइसेंस या संचालन पर कोई अंतिम प्रतिबंधात्मक निर्णय नहीं लिया गया है।
प्रार्थना अस्पताल घटना: 21 वर्षीय छात्र की इलाज के दौरान मौत

हाल ही में रीवा के प्रार्थना अस्पताल में 21 वर्षीय इंजीनियरिंग छात्र अक्षत शुक्ला की इलाज के दौरान हुई मृत्यु के बाद परिजनों ने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया।
घटना के मुख्य विवरण:
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मरीज का विवरण: 21 वर्षीय अक्षत शुक्ला को अचानक तबीयत बिगड़ने पर प्रार्थना अस्पताल ले जाया गया था।
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रेफरल विवाद: परिजनों का सीधा आरोप था कि सरकारी अस्पताल (SGMH) में पदस्थ चिकित्सक द्वारा उन्हें मरीज को निजी प्रार्थना अस्पताल में भर्ती कराने की सलाह दी गई थी।
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उपचार में लापरवाही का दावा: परिजनों का कहना है कि सही समय पर उचित आईसीयू देखभाल न मिलने और इलाज में देरी के कारण छात्र ने दम तोड़ दिया।
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मांग: परिजनों ने मांग की है कि सरकारी अस्पतालों से मरीजों को निजी नर्सिंग होम में रेफर करने वाले डॉक्टरों और प्रार्थना अस्पताल के प्रबंधन पर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
हृदय रोग विशेषज्ञ विवादित वीडियो मामला और कानूनी स्थिति

रीवा मेडिकल कॉलेज से संबद्ध वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ (Cardiologist) डॉ. के.डी. सिंह से जुड़ा एक आपत्तिजनक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रशासनिक अमले में हलचल मच गई थी।
घटनाक्रम और वर्तमान कानूनी स्थिति:
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प्रशासनिक निरीक्षण: वीडियो सामने आने के बाद तत्कालीन कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक की टीम ने संबंधित निजी क्लिनिक/स्थान पर दबिश दी थी और परिसर को सील करने के निर्देश जारी किए थे।
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न्यायालय से स्थगनादेश (Stay Order): प्रशासनिक कार्रवाई के अमल में आने से पूर्व ही संबंधित चिकित्सक ने माननीय उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया, जहां से उन्हें स्थगनादेश (Stay Order) प्राप्त हो गया।
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विभाग का रुख: सीएमएचओ कार्यालय और मेडिकल कॉलेज प्रशासन का कहना है कि मामला वर्तमान में माननीय न्यायालय के समक्ष विचाराधीन (Sub-Judice) है, इसलिए न्यायपालिकीय दिशा-निर्देशों के आधार पर ही आगे की अनुशासनात्मक कार्रवाई तय की जाएगी।
सरकारी बनाम निजी अस्पताल: स्वास्थ्य निगरानी प्रणाली पर उठते सवाल
रीवा जिले में घटित इन तमाम घटनाओं ने म.प्र. उपचर्यागृह तथा रुजुकुल अधिनियम (Nursing Home Act) के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रमुख प्रशासनिक व नीतिगत मुद्दे:
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दोहरा रवैया: संजय गांधी अस्पताल (SGMH) में कल्पना मिश्रा प्रकरण जैसी घटनाओं के बाद जहां डीन, अधीक्षक से लेकर ड्रग इंस्पेक्टर तक पर गाज गिरी और निलंबन की कार्रवाई हुई, वहीं निजी अस्पतालों के मामलों में जांच समितियां ठंडे बस्ते में चली जाती हैं।
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लिफ्ट व इंफ्रास्ट्रक्चर ऑडिट का अभाव: निजी अस्पतालों में लिफ्ट सेफ्टी सर्टिफिकेट, फायर एनओसी और बिल्डिंग बायलॉज के पालन का नियमित ऑडिट न होना।
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कट-प्रैक्टिस व रेफरल रैकेट: सरकारी मेडिकल कॉलेज व संजय गांधी अस्पताल से मरीजों को निजी नर्सिंग होम में ट्रांसफर करने के आरोपों पर सख्त विजिलेंस का न होना।
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कमजोर जनसुनवाई व्यवस्था: पीड़ित परिवारों द्वारा सीएम हेल्पलाइन और कलेक्टर जनसुनवाई में दी गई शिकायतों का समयसीमा के भीतर निवारण न होना।


