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October 31, 2026 4:36 pm

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रीवा में खाकी और समदड़िया बिल्डर का ‘खेला’: थाना प्रभारी जी, जरा ‘नियम’ की किताब खोलकर देखिए: समदड़िया परिसर में कोरेक्स का जखीरा आपकी किस धारा में आता है?

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मध्य प्रदेश के रीवा जिले में कानून-व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए आईजी (IG) गौरव राजपूत लगातार बड़ी और ताबड़तोड़ कार्रवाई कर रहे हैं। उनके सख्त तेवरों से अपराधियों में हड़कंप मचा हुआ है, और आम जनता को उम्मीद है कि पुलिस प्रशासन शहर में अमन-चैन कायम करने में पूरी तरह सफल होगा। लेकिन दूसरी ओर, ज़मीनी हक़ीक़त कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। रीवा के समान थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले इलाकों में जो कुछ चल रहा है, वह पुलिस की कार्यप्रणाली और स्थानीय थाना प्रभारी की भूमिका पर बहुत बड़े और गंभीर सवाल खड़े करता है।

आईजी की सख्ती के एक छोर पर जहाँ बड़े खुलासे हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर समान थाने के बिल्कुल पास, यानी समदरिया बिल्डिंग और उसके आस-पास के परिसरों में नशीली कोर्रेक्स (Corex) सिरप की बोतलों और शराब की शीशियों का अंबार लगा हुआ है। सबसे बड़ा और चौंकाने वाला सवाल यह है कि आखिर थाने के ठीक बगल में इतनी भारी मात्रा में अवैध कोर्रेक्स और नशीली सामग्रियां कैसे पहुंच रही हैं? क्या इसके पीछे किसी अंदरूनी मिलीभगत या संरक्षण का खेल चल रहा है? आइए इस पूरे मामले की गहराई से पड़ताल करते हैं और जानते हैं कि आखिर रीवा के इस इलाके में कानून का खौफ क्यों खत्म होता जा रहा है।

समान थाने के बगल में कोर्रेक्स का जखीरा: क्या थाने से ही हो रही है सप्लाई?
समान थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले संवेदनशील इलाकों में इन दिनों नशे के सौदागरों के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्हें पुलिस का बिल्कुल भी डर नहीं है। स्थिति यह है कि थाने के बिल्कुल बगल में स्थित समदरिया बिल्डिंग के नीचे से लेकर ऊपर तक सिर्फ और सिर्फ अंग्रेजी शराब, बीयर और कोर्रेक्स नशीली सिरप की खाली व भरी हुई शीशियां बिखरी पड़ी हैं।

इस बात के पुख्ता वीडियो प्रूफ भी सामने आ चुके हैं, जिसमें साफ तौर पर देखा जा सकता है कि कैसे खुलेआम इमारतों के कोनों और रास्तों में नशे का सामान फेंका गया है। ऐसे में स्थानीय नागरिकों और जागरूक नागरिकों के मन में यह सवाल उठना लाजिमी है कि:

  • क्या थाने के इतने करीब चल रहे इस अवैध कारोबार की भनक थाना प्रभारी को नहीं थी?
    क्या थाने से ही कोर्रेक्स की सप्लाई या संरक्षण दिया जा रहा है?
    आखिर कब तक खाकी की आड़ में इस तरह का नशीला कारोबार फलता-फूलता रहेगा?

इन तमाम सवालों ने समान थाना प्रभारी आशीष मिश्रा की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। जनता अब सीधे तौर पर यह पूछ रही है कि क्या जिम्मेदार अधिकारी गहरी नींद में सो रहे हैं या फिर उन्हें इस अवैध खेल से कोई बड़ा फायदा मिल रहा है?

खुलेआम शराबखोरी और छात्राओं का आना-जाना: बिगड़ती कानून-व्यवस्था
नशे का यह अवैध कारोबार केवल कोर्रेक्स तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके साथ-साथ खुलेआम शराबखोरी का अड्डा भी बनता जा रहा है। समदरिया बिल्डिंग और उसके आस-पास के रास्तों पर दिनदहाड़े लोग शराब पीते हुए नजर आते हैं।

सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इस मार्ग से हर दिन बड़ी संख्या में महिलाओं, कॉलेज की छात्राओं और ट्यूशन आने-जाने वाले छोटे-छोटे बच्चों का आना-जाना लगा रहता है। रास्ते में शराबी किस्म के लोगों का जमावड़ा होने के कारण छात्राओं और महिलाओं को भारी असुरक्षा का सामना करना पड़ता है। हर रोज यहां मारपीट और गाली-गलौज की स्थिति बनती है, जिससे पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि थाने के इतनी नजदीक हो रही इन हरकतों के बावजूद पुलिस कोई ठोस कदम नहीं उठाती। क्या थाना प्रभारी को हर महीने इस अवैध कारोबार से कोई मोटी रकम मिल रही है, जिसके चलते वे आंखें मूंदकर बैठे हैं? यह एक ऐसा गंभीर सवाल है जिसकी उच्चस्तरीय जांच की जानी चाहिए।

नए बस स्टैंड पर लगातार बढ़ रही हिंसा और अराजकता: ऑटो चालकों और सवारियों में मारपीट
समान थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले नए बस स्टैंड की स्थिति भी दिन-प्रतिदिन बदतर होती जा रही है। यहां मनमानी इस हद तक बढ़ चुकी है कि बसों को नियमों के विरुद्ध सीधे बीच सड़क पर खड़ा किया जाता है, जिसके कारण भीषण ट्रैफिक जाम की समस्या उत्पन्न होती है। आम जनता और यात्रियों को घंटों जाम में फंसना पड़ता है।

इसके अलावा, पिछले कुछ दिनों से नए बस स्टैंड पर हिंसा की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। ताजा मामलों की बात करें तो महज दो दिनों के भीतर यहां दूसरी बड़ी मारपीट की घटना सामने आई है। ऑटो किराए को लेकर ऑटो चालकों और सवारियों के बीच खूनी संघर्ष जैसी स्थिति बन गई। सरेआम डंडे और लाठी चलने से यात्रियों में दहशत फैल गई।

घटना 1: दो दिन पहले ऑटो किराए के विवाद को लेकर चालकों ने एक यात्री के साथ जमकर मारपीट की।
घटना 2: स्थिति नियंत्रण से बाहर होने के बावजूद मौके पर समय पर पुलिस बल का न पहुंचना प्रशासन की नाकामी को दर्शाता है।

जब बस स्टैंड जैसे व्यस्त और संवेदनशील इलाकों में इस तरह की अराजकता खुलेआम फैलेगी, तो आम नागरिक खुद को कैसे सुरक्षित महसूस करेगा?

IG गौरव राजपूत की सख्त कार्रवाई बनाम स्थानीय पुलिस की सुस्ती
एक तरफ जहाँ आईजी गौरव राजपूत रीवा संभाग में अपराध और नशे के कारोबार पर नकेल कसने के लिए ताबड़तोड़ रेड और बड़ी कार्रवाई कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय थानों की ऐसी सुस्ती और लापरवाही उन अभियानों पर पानी फेर रही है।

यदि आईजी स्तर के अधिकारी अपराधियों के खिलाफ कड़े कदम उठा रहे हैं, तो मैदानी अमले यानी थाना प्रभारियों की यह जिम्मेदारी बनती है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में पूरी ईमानदारी से कानून व्यवस्था का पालन कराएं। लेकिन समान थाना क्षेत्र का यह पूरा प्रकरण यह साबित करता है कि स्थानीय स्तर पर या तो प्रशासनिक सुस्ती है या फिर मिलीभगत का एक ऐसा जाल बिछा हुआ है जिसमें आम जनता पिस रही है।

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