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November 3, 2026 1:37 am

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छात्रावास में रहने वाले बच्चों की पेट में डाका : जानकारी मिलते ही भड़के कलेक्टर : छात्रावास से नदारद मिले मेस ठेकेदार और वॉर्डन, हो सकती है सख्त कार्यवाही

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मध्य प्रदेश के रीवा जिले से सरकारी छात्रावासों की व्यवस्था पर बड़ा सवालिया निशान लगाने वाला मामला सामने आया है। यहाँ के एक प्रमुख बालक छात्रावास में बच्चों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने का सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है। न केवल बच्चों को खराब और बासी भोजन परोसा गया, बल्कि हॉस्टल की देखरेख करने वाले जिम्मेदार अधिकारी अपनी ड्यूटी से पूरी तरह नदारद मिले। इस पूरे प्रकरण ने प्रशासनिक अमले में हड़कंप मचा दिया है और छात्र संगठनों के साथ-साथ अभिभावकों में भी भारी रोष व्याप्त है।

संडे स्पेशल में बनी खिचड़ी और खराब खाने की हकीकत
नियमों और तय मेनू के अनुसार रविवार के दिन छात्रावासों में विशेष भोजन का प्रावधान होता है ताकि छात्र-छात्राओं को पौष्टिक और अच्छा खाना मिल सके। लेकिन रीवा के इस बालक छात्रावास में स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत थी। दोपहर में मामूली सब्जी बनने के बाद रात के समय छात्रों को खाने में सिर्फ खिचड़ी परोसी गई, वह भी ऐसी जो बासी और खाने योग्य नहीं थी। बच्चों का साफ तौर पर कहना था कि यदि वे ऐसा सड़ा हुआ या बासी खाना खा लेते, तो वे गंभीर रूप से बीमार हो सकते थे। इसी डर और खराब गुणवत्ता के कारण छात्रों ने खाना खाने से साफ इंकार कर दिया।

रात भर भूखे रहे छात्र और मेस संचालक कमल सिंह की मनमानी
जब छात्रों ने घटिया भोजन खाने से मना कर दिया, तो रात के वक्त हॉस्टल में कोई भी जिम्मेदार अधिकारी या वॉर्डन मौजूद नहीं था, केवल एक चौकीदार वहां उपस्थित था। छात्र रात भर भूखे सोने को मजबूर हुए। जब इस मामले की तहकीकात की गई, तो मेस ठेकेदार कमल सिंह ने अपनी गलती मानने के बजाय अजीब तर्क दिया। ठेकेदार का दावा था कि उसने कुछ बच्चों के फीडबैक वीडियो व्हाट्सएप पर भेजे हैं जिनमें बच्चे खाने से संतुष्ट नजर आ रहे हैं। हालांकि, जमीनी हकीकत यह बयां कर रही है कि मेस संचालक द्वारा बच्चों पर दबाव बनाकर और उन्हें डरा-धमकाकर जबरन सकारात्मक वीडियो रिकॉर्ड कराए जा रहे हैं, ताकि उनकी लापरवाही छिप सके।

वॉर्डन धर्मेश शुक्ला की गैर-मौजूदगी और नियमों की अनदेखी
छात्रावास के वॉर्डन धर्मेश शुक्ला की कार्यप्रणाली इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा लापरवाही का बिंदु बनकर उभरी है। नियमानुसार वॉर्डन को छात्रावास परिसर में ही रहना अनिवार्य होता है, और 24 घंटे उनकी देखरेख व निगरानी में छात्रों की सुरक्षा व भोजन व्यवस्था चलती है। लेकिन जब मीडिया और स्थानीय लोग मौके पर पहुँचे, तो वॉर्डन नदारद थे।
स्टाफ और बच्चों ने पूछताछ में बताया कि वॉर्डन कभी-कभार ही हॉस्टल आते हैं और यहां निवास ही नहीं करते हैं। 24 घंटे की अनिवार्य निगरानी के नियम की इस तरह धज्जियां उड़ाए जाने से वॉर्डन की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

मीडिया के संज्ञान में आते ही दिए जांच के आदेश
जब इस गंभीर मामले की कवरेज मीडिया द्वारा की गई और प्रशासनिक अधिकारियों तक यह बात पहुँची, तो मामला सीधे रीवा कलेक्टर के संज्ञान में आया। रीवा न्यूज़ मीडिया द्वारा जब कलेक्टर से इस लापरवाही पर सवाल किए गए, तो उन्होंने तुरंत इसका संज्ञान लेते हुए उच्चस्तरीय जांच के आदेश दे दिए। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि मामले की जल्द से जल्द निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और जो भी दोषी पाया जाएगा (चाहे वह मेस ठेकेदार कमल सिंह हो या वॉर्डन धर्मेश शुक्ला), उसके खिलाफ कड़ी से कड़ी वैधानिक व प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। बालक छात्रावासों में बच्चों के भोजन और सुरक्षा से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। रीवा की यह घटना प्रशासनिक निगरानी की पोल खोलती है। उम्मीद है कि उच्चस्तरीय जांच के बाद दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी ताकि भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति न हो।

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