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November 7, 2026 11:01 pm

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युवाओं को बर्बाद करने वाले तस्करों पर रीवा पुलिस का ताबड़तोड़ एक्शन: 200 ग्राम ब्राउन शुगर के साथ तीन गिरफ्तार, मचा हड़कंप!

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ऋतुराज द्विवेदी (राज्य ब्यूरो) मध्य प्रदेश के रीवा जिले में कानून व्यवस्था और नशा मुक्ति के मोर्चे पर पुलिस ने एक बेहद शानदार और ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। रीवा पुलिस ने गुप्त सूचना और तकनीकी कौशल का बेहतरीन परिचय देते हुए नशे के अवैध कारोबार पर अब तक का सबसे बड़ा प्रहार किया है। इस सनसनीखेज कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 200 ग्राम से अधिक हाई-ग्रेड ब्राउन शुगर को सफलतापूर्वक जब्त किया है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय और खुले बाजार में कीमत लगभग 20 लाख रुपए आंकी जा रही है। इस बड़ी खेप के साथ पुलिस ने तीन शातिर तस्करों को भी दबोचने में कामयाबी पाई है, जिससे शहर के भीतर सक्रिय ड्रग माफियाओं के काले साम्राज्य में भारी खलबली मच गई है।

त्योहारी सीजन और आपराधिक गतिविधियों पर लगाम कसने के लिए रीवा पुलिस लगातार मुस्तैद नजर आ रही है। पुलिस को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ पेशेवर तस्कर शहर के विभिन्न हिस्सों में युवाओं को अपने जाल में फंसाकर प्रतिबंधित और खतरनाक नशीले पदार्थों की आपूर्ति कर रहे हैं। इसी गंभीर स्थिति को भांपते हुए पुलिस ने एक विशेष योजना तैयार की और जाल बिछाकर इस सिंडिकेट के मुख्य चेहरों तक पहुंचने में सफलता प्राप्त की। इतनी बड़ी मात्रा में ब्राउन शुगर का पकड़ा जाना इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि रीवा में एक बहुत बड़ा और खतरनाक ड्रग्स नेटवर्क सक्रिय था, जिसे अब खाकी ने तहस-नहस करना शुरू कर दिया है।

वरिष्ठ अधिकारियों के कुशल नेतृत्व और सटीक रणनीति का असर
किसी भी बड़े आपराधिक रैकेट का पर्दाफाश करने के लिए मजबूत नेतृत्व और सटीक मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है, और रीवा की इस कार्रवाई में पुलिस के शीर्ष नेतृत्व की स्पष्ट छाप देखने को मिली है। रीवा रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (IG) गौरव राजपूत, रीवा रेंज के पुलिस उप महानिरीक्षक (DIG) हेमंत चौहान और रीवा पुलिस अधीक्षक (SP) डॉ. गुरकरण सिंह के कुशल निर्देशन तथा मार्गदर्शन में इस पूरे ऑपरेशन को प्लान किया गया था। वरिष्ठ अधिकारियों की पैनी नजर और रणनीतिक सूझबूझ के कारण ही पुलिस टीम इस जटिल ड्रग्स नेटवर्क की तह तक पहुंचने में कामयाब हो पाई।

उच्चाधिकारियों द्वारा समय-समय पर दिए गए दिशा-निर्देशों और अपराध के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति ने मैदानी अमले में एक नया जोश भरा। सीएसपी (CSP) राजीव पाठक के प्रत्यक्ष मार्गदर्शन और कोतवाली थाना प्रभारी निशा मिश्रा के नेतृत्व में एक विशेष पुलिस टीम का गठन किया गया था। वरिष्ठ अधिकारियों के इस मजबूत प्रशासनिक समन्वय का ही परिणाम है कि बिना किसी चूक के इस हाई-प्रोफाइल ऑपरेशन को बेहद पेशेवर तरीके से अंजाम दिया गया, जिसकी सराहना पूरे प्रदेश में हो रही है।

मुखबिर तंत्र और ‘मिस कॉल’ कोड वर्ड का इस्तेमाल कर बिछाया गया जाल
इस पूरी कार्रवाई का सबसे दिलचस्प और हैरान करने वाला पहलू अपराधियों तक पहुंचने का तरीका रहा है। पुलिस ने पारंपरिक तरीकों से हटकर आधुनिक और शातिर तकनीक का इस्तेमाल किया। मुखबिर से मिली खास सूचना के आधार पर पुलिस ने तस्करों के बीच इस्तेमाल होने वाले सीक्रेट कोड वर्ड यानी ‘मिस कॉल’ की तकनीक को डिकोड किया। तस्कर आपस में संपर्क साधने और डिलीवरी तय करने के लिए एक तयशुदा कोड या मिस कॉल का इस्तेमाल करते थे, ताकि सुरक्षा एजेंसियों की नजरों से बच सकें।

पुलिस ने इसी तकनीकी कमजोरी और कोड वर्ड का फायदा उठाते हुए तस्करों के जाल में उन्हीं की चाल चल दी। पुलिस ने ग्राहक बनकर या इस कोड वर्ड के जरिए तस्करों से संपर्क साधा और उन्हें एक निश्चित स्थान पर डिलीवरी के लिए राजी कर लिया। जब तक तस्करों को यह समझ आता कि वे पुलिस के बिछाए हुए जाल में फंस चुके हैं, तब तक चारों तरफ से पुलिस बल ने उन्हें पूरी तरह से घेर लिया था। यह स्मार्ट पुलिसिंग का एक बेहतरीन उदाहरण है, जहां मुखबिर तंत्र और तकनीकी सर्विलांस का अद्भुत तालमेल देखने को मिला।

मुख्य तस्कर गोपाल जी गुप्ता समेत तीन आरोपियों की गिरफ्तारी और बरामदगी
पुलिस की इस छापामार कार्रवाई में शिकंजे में फंसे मुख्य तस्कर और उसके सहयोगियों की पहचान उजागर हो चुकी है। इस रैकेट का मुख्य मास्टरमाइंड या प्रमुख तस्कर गोपाल जी गुप्ता बताया जा रहा है, जिसे पुलिस ने उसके अन्य साथियों के साथ धर दबोचा है। गोपाल जी गुप्ता लंबे समय से रीवा और आसपास के इलाकों में इस अवैध नेटवर्क को संचालित कर रहा था और युवाओं को नशे के दलदल में धकेलने का काम कर रहा था। उसकी गिरफ्तारी से इस अवैध धंधे से जुड़े कई अन्य छोटे-बड़े मोहरों के नाम भी सामने आने की पूरी संभावना है।

पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ का सिलसिला लगातार जारी है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि गोपाल जी गुप्ता के इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं और यह ब्राउन शुगर रीवा के बाहर से किस मुख्य सप्लायर के जरिए मंगाई जाती थी। आरोपियों के पकड़े जाने से रीवा के स्थानीय अपराधियों और नशा तस्करों में भारी दहशत का माहौल है। पुलिस का यह एक्शन यह साबित करता है कि कानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं और अपराध करने वाला कितना भी शातिर क्यों न हो, एक दिन पुलिस की गिरफ्त में आ ही जाता है।

लग्जरी कार, महंगे आईफोन और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जब्ती
इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने केवल ब्राउन शुगर ही बरामद नहीं की, बल्कि तस्करों के विलासितापूर्ण साधनों और अपराध में इस्तेमाल होने वाली सामग्रियों को भी जब्त किया है। आरोपियों के कब्जे से एक हाई-एंड लग्जरी कार बरामद की गई है, जिसका इस्तेमाल वे इस नशीले पदार्थ की ढुलाई और एक जगह से दूसरी जगह सुरक्षित सप्लाई के लिए करते थे। इसके अलावा, दो महंगे Apple (आईफोन) मोबाइल फोन और एक अन्य स्मार्टफोन भी जब्त किए गए हैं, जिनका उपयोग तस्कर आपस में एन्क्रिप्टेड चैट और कॉलिंग के लिए करते थे।

तस्करों के पास से मादक पदार्थों को तौलने के लिए इस्तेमाल होने वाले बारीक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और वेइंग मशीन भी बरामद हुई है, जिससे यह साफ होता है कि वे ग्राहकों को देने से पहले ब्राउन शुगर की सटीक तौल और पैकेट बनाने का काम इसी ठिकाने से करते थे। पुलिस इन सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेसिक और तकनीकी जांच करवा रही है ताकि इनके मोबाइल्स में मौजूद कॉलिंग डेटा, चैट हिस्ट्री और बैंक ट्रांजैक्शन के जरिए पूरे सिंडिकेट के वित्तीय स्रोतों का काला चिट्ठा खंगाला जा सके।

एनडीपीएस एक्ट के तहत सख्त कानूनी शिकंजा और आगे की तफ्तीश
रीवा पुलिस ने इस गंभीर मामले में किसी भी प्रकार की ढिलाई न बरतते हुए पकड़े गए सभी आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस (NDPS – Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act) एक्ट की बेहद कड़ी और गैर-जमानती धाराओं के तहत प्रकरण पंजीबद्ध कर लिया है। पुलिस का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि इन अपराधियों को अदालत से कड़ी से कड़ी सजा मिले ताकि भविष्य में कोई भी रीवा की युवा पीढ़ी के भविष्य के साथ इस तरह खिलवाड़ करने की हिम्मत न कर सके।

मामले की विस्तृत जांच अभी भी प्रचलन में है। सीएसपी राजीव पाठक और थाना प्रभारी निशा मिश्रा के नेतृत्व में पुलिस की अलग-अलग टीमें इस बात की तहकीकात कर रही हैं कि इस ब्राउन शुगर को रीवा में किन-किन लोगों को सप्लाई किया जाना था। क्या इसमें शहर के कुछ रईसजादे या अन्य संदिग्ध लोग भी शामिल हैं? इन सभी बिंदुओं पर गहनता से काम किया जा रहा है। रीवा पुलिस का यह ठोस कदम इस बात का परिचायक है कि शहर को नशा मुक्त बनाने के लिए प्रशासन पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।

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