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November 3, 2026 3:55 pm

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खाद्य विभाग की ताबड़तोड़ रेड : रीवा में मौत का काला कारोबार बेनकाब! राजवाड़ा स्वीट्स के रसगुल्ले में केमिकल डालते ही उड़ गए होश, मचा हड़कंप!

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त्योहारों का मौसम शुरू होते ही बाजारों में रौनक बढ़ जाती है, लेकिन इसके साथ ही मिलावटखोरों का काला कारोबार भी तेजी से फैलने लगता है। हाल ही में मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र के प्रमुख शहर रीवा से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहाँ दीपावली के पावन पर्व से ठीक पहले जिला प्रशासन और खाद्य सुरक्षा विभाग ने मिलावटखोरी के खिलाफ एक बड़ा शिकंजा कसा है। प्रशासन की इस सख्त कार्रवाई से शहर के मिलावटखोर मिष्ठान विक्रेताओं में हड़कंप मच गया है।

त्योहारों के दौरान बाजार में मिठाइयों की मांग अचानक कई गुना बढ़ जाती है, जिसका फायदा उठाने के लिए कुछ बेईमान व्यापारी उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने से बाज नहीं आते हैं। मिलावटी मावा, नकली पनीर और स्टार्च युक्त छेने से बनी मिठाइयां लोगों के शरीर में जहर घोलने का काम करती हैं। इस गंभीर समस्या पर लगाम लगाने के लिए रीवा जिला प्रशासन ने एक विशेष और व्यापक अभियान की शुरुआत की है, जिसके सकारात्मक परिणाम अब धरातल पर दिखने लगे हैं।

राजवाड़ा स्वीट्स पर खाद्य विभाग की रेड
रीवा शहर के व्यस्त इलाकों में शुमार संजय नगर मोड़ पर स्थित एक प्रसिद्ध मिष्ठान प्रतिष्ठान पर प्रशासन की गाज गिरी है। जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों को लगातार मिल रही शिकायतों के आधार पर यह सख्त कदम उठाया गया है। रीवा कलेक्टर के सख्त दिशा-निर्देशों के तहत खाद्य सुरक्षा विभाग की विशेष मोबाइल टेस्टिंग लैब ने अचानक इस प्रतिष्ठान पर दस्तक दी और ताबड़तोड़ निरीक्षण शुरू कर दिया।

अचानक हुई इस औचक कार्रवाई से दुकान के कर्मचारियों और संचालकों के होश उड़ गए। खाद्य विभाग की टीम ने दुकान के भीतर रखे विभिन्न खाद्य पदार्थों, विशेषकर दूध और छेने से बनी मिठाइयों के नमूनों को तुरंत एकत्र किया। इस दौरान दुकान में काम करने वाले कर्मचारियों से स्टॉक और सामग्री के स्रोतों के बारे में भी पूछताछ की गई। प्रशासनिक अमले की इस पारदर्शी और त्वरित कार्रवाई ने यह संदेश साफ कर दिया है कि त्योहारी सीजन में आम जनता की सेहत के साथ खिलवाड़ करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।

केमिकल टेस्ट में खुला मिलावट का राज
खाद्य सुरक्षा विभाग की मोबाइल लैब की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह किसी भी खाद्य पदार्थ में मिलावट का सच मौके पर ही चंद मिनटों में उजागर कर देती है। जब जांच दल ने संजय नगर मोड़ स्थित इस प्रतिष्ठान में निर्मित छेना रसगुल्लों की गहनता से पड़ताल की, तो उसमें चौंकाने वाला तथ्य सामने आया। रसगुल्लों में मानक गुणवत्ता के विपरीत भारी मात्रा में स्टार्च (यानी मैदा अथवा अरारोट) की मिलावट पाई गई।

जांच प्रक्रिया के दौरान जैसे ही खाद्य विशेषज्ञों ने छेने के सैंपल पर निर्धारित रासायनिक घोल (केमिकल) डाला, रसगुल्ले का रंग पलक झपकते ही पूरी तरह काला पड़ गया। रंग में आया यह नाटकीय परिवर्तन इस बात का अकाट्य प्रमाण था कि मिठाई बनाने में शुद्ध दूध या छेने के बजाय मिलावटी और घटिया सामग्री का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा था। वैज्ञानिक परीक्षण में मिलावट की पुष्टि होने के बाद टीम ने बिना किसी देरी के मौके पर मौजूद सारी संदिग्ग्ध सामग्री को अपने कब्जे में ले लिया।

त्योहारों पर स्वास्थ्य से खिलवाड़ और प्रशासन की सख्ती
त्योहार खुशियों और मेल-मिलाप का प्रतीक होते हैं, लेकिन जब मिठाइयों में मिलावट का जहर घुल जाता है, तो ये खुशियां बीमारियों में बदल जाती हैं। स्टार्च, यूरिया, सिंथेटिक दूध और हानिकारक रंगों से बनी मिठाइयों का सेवन करने से पेट के गंभीर संक्रमण, फूड पॉइजनिंग, और लंबे समय में लीवर-किडनी जैसी घातक बीमारियां हो सकती हैं। बच्चे और बुजुर्ग इन मिलावटी पदार्थों के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील होते हैं।

रीवा जिले में इस प्रकार की अमानक गतिविधियों को रोकने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहा है। कलेक्टर के निर्देशन में चल रहे ‘मिलावट से मुक्ति अभियान’ के तहत अब तक दर्जनों दुकानों पर सैंपलिंग की जा चुकी है। प्रशासन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इस प्रकार के मामलों में केवल जब्ती तक कार्रवाई सीमित नहीं रहेगी, बल्कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम (FSSAI) के तहत कठोर वैधानिक मुकदमे दर्ज कर भारी जुर्माने और सजा का प्रावधान सुनिश्चित किया जाएगा।

आम जनता के लिए जरूरी सावधानियां
त्योहारों के इस उल्लासपूर्ण माहौल में आम नागरिकों को भी अपनी सेहत को लेकर अत्यधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है। मिठाई खरीदते समय कुछ बुनियादी बातों का ध्यान रखकर ग्राहक खुद को और अपने परिवार को सुरक्षित रख सकते हैं:

हमेशा प्रतिष्ठित, विश्वसनीय और लाइसेंस प्राप्त मिष्ठान विक्रेताओं से ही मिठाइयां खरीदें। बहुत अधिक चमकीले, कृत्रिम रंगों या असामान्य रूप से सस्ती मिठाइयों को खरीदने से परहेज करें। यदि किसी मिठाई की बनावट, गंध या स्वाद में जरा भी संदेह हो, तो उसका सेवन बिल्कुल न करें। खुली मिठाइयों की बजाय ढकी हुई और साफ-सुथरी जगहों पर रखी गई सामग्री को प्राथमिकता दें। किसी भी प्रकार की मिलावट या गड़बड़ी की आशंका होने पर तुरंत जिला प्रशासन या खाद्य सुरक्षा विभाग को इसकी सूचना दें।

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