ऋतुराज द्विवेदी। मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक शहर रीवा में त्योहारी सीजन आते ही प्रशासनिक सुस्ती और नियमों की अनदेखी एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है। दीपावली जैसे बड़े पर्व पर पटाखों की मांग आसमान छूने लगती है, जिसका फायदा उठाने के लिए कई अवैध कारोबारी घनी बस्तियों और रिहायशी मकानों के बीच भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री का भंडारण करने लगते हैं। रीवा शहर के विभिन्न सघन आवासीय क्षेत्रों में जिस प्रकार लाखों रुपए के पटाखे घरों के अंदर डंप किए जा रहे हैं, वह किसी बड़े हादसे को खुला निमंत्रण दे रहा है। नागरिकों की सुरक्षा ताक पर रख कर चलाए जा रहे इस अवैध कारोबार पर जिम्मेदार विभागों की चुप्पी कई गंभीर सवाल खड़े करती है।
प्रशासनिक दबिश और औपचारिकता: दीपू भाई पटाखा वाले के यहां की घटना
बीते बुधवार की देर रात रीवा शहर की प्रशासनिक टीम और स्थानीय पुलिस बल को गुप्त सूचना मिली थी कि शहर के एक सघन रिहायशी इलाके में स्थित दीपू भाई पटाखा वाले की दुकान और उससे जुड़े मकान में भारी पैमाने पर अवैध पटाखों का भंडारण किया गया है। सूचना मिलते ही प्रशासनिक अमला मौके पर दबिश देने पहुंचा। जांच के दौरान अधिकारियों की आंखें फटी रह गईं जब उन्होंने देखा कि एक आम आवासीय मकान के कमरों में लाखों रुपए के पटाखे ठूंस-ठूंसकर भरे हुए हैं।
तमाम नियमों, विस्फोटक सुरक्षा मानकों और स्पष्ट सबूतों के बावजूद हैरानी की बात यह रही कि मौके पर पहुंची टीम ने बिना कोई जब्ती कार्रवाई किए और बिना किसी ठोस कानूनी कदम के बैरंग लौट आई। यह पूरी दबिश महज एक कागजी औपचारिकता बनकर रह गई, जिससे स्थानीय लोगों में भारी रोष व्याप्त है।

कानूनी व प्रशासनिक सवाल: अधिवक्ता बीके माला की प्रतिक्रिया और पक्ष
इस सनसनीखेज मामले के सामने आने के बाद शहर के प्रबुद्ध वर्ग और कानूनविदों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर तीखा प्रहार किया है। रीवा के जाने-माने अधिवक्ता बीके माला ने इस घटना को आम नागरिकों की जान और माल की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने वाला एक गंभीर आपराधिक कृत्य करार दिया है।
उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि यदि निरीक्षण के दौरान स्पष्ट रूप से नियमों का उल्लंघन और अवैध भंडारण पाया गया था, तो प्रशासनिक अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से जब्ती की कार्रवाई करते हुए एफआईआर दर्ज करनी चाहिए थी। केवल औपचारिकता निभाने के लिए दबिश देकर लौट आना यह दर्शाता है कि स्थानीय प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है।
दूसरी ओर, इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए एडिशनल एसपी भावना मरावी ने स्पष्ट किया है कि पुलिस विभाग की ओर से शहरभर के वैध पटाखा कारोबारियों के लाइसेंस और स्टॉक की निरंतर जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि गोदामों के भौतिक सत्यापन और राजस्व संबंधी अन्य विसंगतियों पर सख्त कार्रवाई मुख्य रूप से राजस्व विभाग के माध्यम से सुनिश्चित की जा रही है।

पूर्व की कार्रवाई: अमहिया में पकड़े गए 24 कार्टून अवैध पटाखे
रीवा शहर में अवैध पटाखों के भंडारण और परिवहन का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी शहर के संवेदनशील इलाकों में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया था। अमहिया थाना क्षेत्र के अंतर्गत पुलिस ने एक संदिग्ध वाहन की तलाशी के दौरान भारी मात्रा में अवैध पटाखे बरामद किए थे।
उस कार्रवाई में वाहन से कुल 24 कार्टून अवैध पटाखे जब्त किए गए थे, जिनकी बाजार में अनुमानित कीमत करीब डेढ़ लाख रुपए (₹1.5 Lakhs) आंकी गई थी। उस वक्त पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को धर दबोचा था और मामला दर्ज किया था। ऐसे में, जब पहले भी बड़ी कार्रवाई हो चुकी है, तब वर्तमान मामले में प्रशासनिक टीम द्वारा नरमी बरतना और बिना कार्रवाई के लौट जाना प्रशासनिक तंत्र की कार्यशैली पर एक बड़ा धब्बा है।
सुरक्षा मानक और नियम 82: गोदाम के लिए लाइसेंस और नियम
विस्फोटक अधिनियम और प्रशासनिक नियमावली के तहत पटाखों के भंडारण और बिक्री के लिए बेहद कड़े कानून बनाए गए हैं। कानून के नियम 82 के प्रावधानों के मुताबिक, किसी भी व्यापारी को मुख्य बाजार या रिहायशी इलाके से दूर, निर्धारित खुले स्थान पर पटाखों के गोदाम के लिए एक अलग से विशेष लाइसेंस लेना अनिवार्य होता है।
इस नियम के तहत एक प्राधिकृत गोदाम में अधिकतम 5 हजार किलोग्राम (5,000 Kg) तक के पटाखे ही सुरक्षित तरीके से रखे जा सकते हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उस अधिकृत गोदाम का उपयोग किसी भी स्थिति में खुदरा या थोक बिक्री के लिए सीधे तौर पर नहीं किया जा सकता है। गोदाम के निर्माण से लेकर वहां वेंटिलेशन, अग्निशामक यंत्रों की उपलब्धता और पर्याप्त दूरी जैसे सभी सुरक्षा मानकों का पालन करना कानूनी रूप से अनिवार्य होता है। इसके विपरीत, जब घनी बस्तियों के बीच बने आम मकानों में इस प्रकार का भंडारण किया जाता है, तो यह सीधे तौर पर विस्फोटक नियमों का खुला उल्लंघन है।
रिहायशी इलाकों में अवैध भंडारण के जानलेवा जोखिम
रीवा जैसे घनी आबादी वाले शहरों के रिहायशी मकानों में लाखों रुपए के पटाखों का अवैध भंडारण किसी भी पल एक भीषण त्रासदी को जन्म दे सकता है। पटाखों में इस्तेमाल होने वाला बारूद अत्यधिक संवेदनशील होता है। यदि थोड़ी सी भी लापरवाही, शॉर्ट सर्किट, जलती हुई बीड़ी-सिगरेट या घर के भीतर किसी अन्य कारण से आग लग जाती है, तो यह चंद सेकेंडों में पूरे मोहल्ले को अपनी चपेट में ले सकती है।
इस प्रकार के हादसों में न केवल भंडारण करने वाले का मकान तबाह होता है, बल्कि आसपास की दुकानें, कंजेशन वाली गलियां और सटे हुए रिहायशी मकान भी मलबे और आग में तब्दील हो सकते हैं। प्रशासन की यह अनदेखी रीवा के नागरिकों के जीवन को खतरे में डाल रही है। शहर के अन्य वार्डों और बस्तियों में भी इस तरह के अवैध गोदामों की सघन जांच किए जाने की तत्काल आवश्यकता है। रीवा शहर में दीपू भाई पटाखा वाले के यहां सामने आया यह मामला इस बात का प्रमाण है कि त्योहारी सीजन में किस प्रकार सुरक्षा नियमों को ताक पर रखकर अवैध कारोबार फल-फूल रहा है। जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।
यदि शुरुआती दौर में ही ऐसे मामलों में सख्त कानूनी कार्रवाई, जब्ती और लाइसेंस निरस्तीकरण की कार्रवाई नहीं की गई, तो भविष्य में किसी बड़े हादसे की जिम्मेदारी सीधे तौर पर प्रशासन की होगी। उच्चाधिकारियों को चाहिए कि वे इस मामले का संज्ञान लेते हुए एक निष्पक्ष जांच टीम गठित करें और बिना किसी दबाव के अवैध भंडारण करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें।


